बुधवार, 29 मार्च 2017

उलझन

12वी कक्षा के पहले प्रीबोर्ड इम्तिहान हाल ही मे खत्म हुए थे, परिणाम की भी घोषणा हो चुकी थी लेकिन प्रथम स्थान हासिल करने वाले छात्र को छोड़कर बाकी सभी बच्चे निराश थे क्योंकि ये परिणाम उनकी आशा अनुसार नही रहे थे । बोर्ड परीक्षा का दबाव, घर से माता पिता की समझाइश और हर पल को दी जाने वाली हिदायते, इनसे कुछ छात्र प्रभावित भी नही थे तो कुछ पर इनका गहरा असर पड़ा था ।
         एक लड़का जो कि कक्षा मे दुसरे स्थान पर रहा था जिसका नाम था आयुष्मान जो इन चीजो से बहुत परेशान सा था क्योंकि उसके और अव्वल आने वाले छात्र के बीच एक बड़ा अंतर था । परिणाम के बाद से ही घर वाले उस पर पढ़ाई करने का दबाव बना रहे थे तो कुछ सहपाठी दोस्तो ने उससे दूरियां बना ली थी ,जिसके चलते वह अवसाद  (depression ) का शिकार होने जा रहा था और इस हालत मे कोई उसे सुधारने का प्रयास भी नही कर रहा था ।
       दुसरे प्रीबोर्ड की तैयारी शुरू हो चुकी थी जिसके अंतर्गत पहले पांच छात्रो को कुछ बच्चो के समूह आवंटित किए गए थे, तो आयुष्मान को भी इसका हिस्सा बनना जरूरी था और उसे भी तीन लड़को और दो लड़कियो का समूह मिला था । अब आयुष्मान को इन लोगो से हर बात साझा करनी थी ताकि उनका परिणाम अच्छा हो सके । इस समूह मे कक्षा की बेहद संवेदनशील और गंभीर छात्रा भी थी जिसका नाम शिवन्या था, उसकी इस क्षमता और आयुष्मान से रोज होती बातचीत इक बात का कारण बनी कि शिवन्या ने उसके हालात को भांप लिया और मौका मिलते ही आयुष्मान से पुछा भी, लेकिन उसने बात को टाल दिया पर ये लड़की भी कहाँ मानने वाली थी उसकी जिद के आगे आयुष्मान को झुकना पड़ा और अंततः उसने सब कुछ बतला दिया । शिवन्या ने उसे समझाया और हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया । दोनो जल्द ही अच्छे दोस्त बन गए, रोज रोज की मुलाक़ाते और बातचीत के चलते कब उनके दुसरे इम्तिहान गुजर गए पता भी नही चला, खैर उन्होंने शीर्ष पांच मे स्थान काबिज करके ये जता दिया था कि उनकी दोस्ती ने उनकी पढ़ाई को उलझाया नही था । सभी लोग उनसे खुश हो गए थे अब तक काफी गहराई तक उनके रिश्ते की बुनियाद हो गई थी । इक-दूजे का इंतजार करना, बाते करना उनकी आदत बन गई थी और कभी कभी तो आयुष्मान की अनुपस्थिति की झलक शिवन्या के चेहरे पर ही दिख जाती थी । विद्यालय के अंदर ही छात्रावास होने के कारण उनके अनेक दोस्त थे तो एक रिवाज के अनुसार उन्होंने अपनी स्लेम  ( dairy ) दोस्तो को दी थी अब आयुष्मान और शिवन्या भी इसका हिस्सा थे तो उन्होंने भी अपने जज्बात लिखे थे । शिवन्या ने आयुष्मान के लिए वो सब कुछ लिखा था जो कि एक दिवाना लिखा करता है, और जब यह सब आयुष्मान ने पढ़ा तो वह उलझन मे पड़ गया क्योंकि वो बात उसने कभी महसूस नही की थी लेकिन सबसे ज्यादा वो परेशान हुआ एक बात को लेकर जिसमे जिक्र था कि शिवन्या का उसके जैसा कोई ना था और वह उसके जैसा जीवनसाथी पाने की आस लिए थी, इन सब से आयुष्मान शिवन्या के जज्बात और उन दोनो के रिश्ते मे उलझ गया था । दोनो ही महसुस कर रहे थे कि क्या चल रहा था लेकिन पूछने की हिम्मत नही कर पाए थे ।

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                    एक रात जब आयुष्मान अपने हॉस्टल के बगीचे मे बैठा इन्ही सब बातो को सोच रहा था तभी उसका एक अजीज दोस्त जो कि उसके एहसासो को आँखो से पढ़ने की कला जानता था तो उसने आयुष्मान से पुछा भी और सब कुछ सुनने के बाद ये कह दिया के "तुम दोनो की दोस्ती अब मोहब्बत की राह पर चल रही है " जिसे सुनकर आयुष्मान के होश उड़ गए । उसने इस बात को मानने से इंकार कर दिया लेकिन काफ़ी समझाने पर और उसकी वर्तमान मे चल रही जिदंगी पर गौर करने से उसे एक बात तो समझ आ रही थी कि वो बात सच है । एक कहावत याद आती है कि छोटे मोटे झगड़े रिश्ते मे मिठास घोलते है तो एक ऐसा ही झगड़ा हमारे किरदारो में भी हुआ, लेकिन आयुष्मान को पता नही क्या सूझा के उन जनाब ने शिवन्या से पुरे एक दिन ना तो बातचीत की और ना ही मुलाकात । अगले दिन आयुष्मान ने  बर्थ-डे ब्वाय बन कर इस आस के साथ कक्षा मे प्रवेश किया के शिवन्या उसका इंतजार कर रही होगी ,ये हुआ भी लेकिन जनाब को मिला इक करारा तमाचा और साथ मे बहुत खिंचाई हुई सिर्फ कल वाली हरकत के लिए । बाद मे जब शिवन्या को लगा के नही उसने गलत किया है तो उसने आयुष्मान को मुबारकबाद दी और मना भी लिया । लेकिन इसके दिमाग मे न जाने कौन सी बात चल रही थी इसने एक बड़े से खत के साथ शिवन्या को जवाब दिया और चला गया । शाम के वक्त शिवन्या थोड़ी उदास लेकिन संतुष्ट दिखाई दी, अगले दिन हमारे जनाब को रिटर्न गिफ्ट मिला जिसे पाकर कोई भी आशिक खुशी ना छुपा सके ।

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         एक दुसरे को खत लिखकर इन्होंने अपनी बात कह तो दी लेकिन लफ्जो की बारी आई नही थी, दोनो डर रहे थे कि ना जाने क्या होगा और इस इंतजार मे उन बेगानो के इम्तेहान खत्म होने के कगार पर पहुंच गए थे और उन्हे इस बात का ध्यान भी नही था । इसी तरह शिवन्या का आखिरी पेपर आ गया था और इस दिन तो आयुष्मान दो बातो से परेशान था एक तो गणित का इम्तिहान और शिवन्या के साथ आखिरी दिन । पहली परेशानी 1 बजे तक दूर हुई और अब यह वक्त बहुत कीमती था, इस पागल लड़के को भी इक बात सूझी और ये बेखौफ लड़कियो के हाॅस्टल पंहुच कर शिवन्या को अपनी कक्षा मे ले आया, शिवन्या बात को समझ सकती थी तो उसने अपने दोस्त को समझाया कि इस पल उन्हे कुछ और सोचना चाहिए जैसे कि जिदंगी के लिए लेकिन आयुष्मान ने उसकी बात को बीच मे ही काट दिया और उससे वो सवाल कर दिया जिसका जवाब उसे खत मे मिला था । शिवन्या जवाब देने की हालत में नही थी क्योंकि के वो घबराई हुई थी तो उसने बिना कुछ कहे आयुष्मान के हाथो में अपना हाथ देकर वही ठहरने का फैसला किया ।
       ये दोनो काफ़ी देर तक बाकी लोगो की नजरो से गायब थे तो इनकी खोजबीनशुरू हो गई थी इनके दोस्तो के द्वारा । खोजते हुए वे लोग कक्षा में भी पंहुचे जहाँ ये प्रेमी युगल बैठा था और बाकी लोगो के अचानक पहुंचने से  डिस्टर्ब हो गया था । इसके बाद शिवन्या वहाँ से जाने लगी और जब कुछ दूर जाकर वापस मुड़ी तो आयुष्मान की आँखो से उलझ गई जो अब भी वही सवाल कर रही थी, पता नही क्या सोचकर वो लौटी और आयुष्मान के ख्यालो से परे  उसने आयुष्मान को गले लगा लिया फिर वह वहाँ से चली गई । इसके बाद तो जैसे आयुष्मान का वक्त ही थम गया था, वो एक सवाल मे उलझा हुआ था कि यह सब उसके प्यार की शुरुआत थी या एक हसीन से ख्वाब का अंत ..........।
                                    
    
    .....कमलेश.....

सोमवार, 27 मार्च 2017

इस बार की मुलाकात में

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मिलने आया हूँ तुमसे
सारी ख्वाहिशों को रख परे
तुम भी सुन लेना फिर
उन अनकही बातों को
जो इस बार की मुलाकात मे
एक-दूसरे को हम कहेंगे नही ।

सारा जहान् समेट लूँगा
जब तुम सामने रहोगी
बाँहो मे लेकर जवाब दूंगा
जब भी कोई सवाल करोगी
हर बार ना हुआ वो होगा
इस बार की मुलाकात में ।

लाऊँगा तुम्हारे लिए मैं
कुछ लम्हे प्यार से भरे
बिताकर उन्हें तुम्हारे संग
हो जाएंगे दुनिया से परे
ना रहेगा कुछ भी अधूरा
इस बार की मुलाकात में ।
                            .....कमलेश.....

शनिवार, 18 मार्च 2017

होली का रंग

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लगता है मथुरा, काशी
सारे मेरे करीब आये है
दिलो की नफ़रते जलाकर
ये होली मनाने आए है
हो जाता है एक इस तरह
कश्मीर और कन्याकुमारी भी
तब सिमट जाता है फासला
गुजरात और आसाम का
रंग जाता है हर कोई
रंगो की गहरी चादरों में
भुलाकर हर शिकवा गिला
रंगो में रंग जाता है ।
thefreshquotes.com

खेलता हूँ फिर मैं भी
इन सारे रंगो के साथ
थमते है क्यूँ हाथ मेरे
सोचकर के इक बात
वो कैसे होली खेलेंगे
कुरबान हुए जो वतन पे
के क्या वो होली खेलेंगे
बदले जो परिवर्तन से
सुनाता है कोई ये खबर
के देश में खुशी छाई है
अरसो बाद किसी छवि ने
भारत की छवि बनाई है ।
Indianexpress.com
           
उठता है सैलाब फिर
दिल में उम्मीदों का
के बदलने वाला है वक्त
हमारे प्यारे वतन का
चढ़ा है गुलाल सत्ता का
ना चढ़ जाए इस कुर्सी का
कुबूल करे वो जनसेवक
आदेश देश की जनता का
छाती है मुस्कान फिर से
मेरे सुखे अधरों पर
उठा लेता हूँ थाल वो
रंगो में रंग जाता हूँ ।
                     .....कमलेश.....



गुरुवार, 9 मार्च 2017

मिलन

दबाकर दिल में हसरतें
तुम तक चला आया हूँ
कैद है पलको में अरमान
जो मिलन पर पूरे हो जाएंगे ।
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इक हसीन शाम के साथ 
होगा ढलता हुआ सूरज
टूट जाएगी जब बेड़ियाँ
ना रहेगा मजहब इश्क में
तुझे ख्वाहिशें सुनाऊँगा अपनी
जब हमारा मिलन हो जाएगा ।

फिर तेरी बाँहों में गुजरेगी
खूबसूरत हर शाम मेरी
जब मिट जाएगी दूरियाँ
फासला ना रहेगा दिलों में
तेरे सपनों को पूरा करूँगा
जब तुझसे मिलन हो जाएगा ।

बंदिशें टूटेगी जमाने की
रात जब वो आ जाएगी
तेरे इशारों को समझ लूँगा
मोहब्बत ये आशना होगी
हम अपनी दुनिया बनाएंगे
जब मेरा तुझमें मिलन होगा ।
                              .....कमलेश.....


शनिवार, 4 मार्च 2017

तुझे अपना वजूद बचाना है

ये पथरीली राहें है जिंदगी की 
                     हर कोई चल ना पाता है यहाँ
                     संभलकर लड़ना मुश्किलो से
                     तुझे अपना वजूद बचाना है ।
Storymantra.com

      धोखे भी दिए जाएंगे तुझे
      सामने मीठा बोल कर तेरे
      छुरी को पीठ मे उतारेंगे
      सुनना आवाज बस दिल की
      हर जवाब जहाँ कैद रहता है
      दुनिया से लड़ते रहकर भी
      तुझे अपना वजूद बचाना है ।
Swatisani.net
  हर कदम पर दर्द भी होगा
  जो अपनो की ही देन होगा
  ना छोड़ देना उम्मीद को तू
  कितना ही अँधेरा क्यूँ ना होगा
  करना ऐतबार अपने रब पर
  जो मदद को तैयार रहता है
  जीतकर अपनी ही बुराइयों से
  तुझे अपना वजूद बचाना है ।
                           .....कमलेश.....


तुमने ( सियासतदार )

Source - Hindustan Times फिर मुस्कराहट को खामोश कर दिया तुमने, फिर एक दिये की लौ को बुझा दिया तुमने । अभी तो यह जहान् देख भी नही...