रविवार, 30 अप्रैल 2017

चलना....


Source-GoogleWallpapers

एक रास्ता दिखाई पड़ रहा है
जिस पर सब चले जा रहे है,
बिना कुछ सोचे बिना कुछ समझे
या तो किसी की बात मानकर
या फिर किसी और के देखादेखी
अपनी कोई सुनता ही नहीं है |


सिर झुकाकर चला जा रहा है,
लगता है इंसान भेड़ बन गया है
अपने ही जीवन को डुबो रहा है
किसी आगे चलने वाले को देखकर,
ना खुद की कोई मंजिल चुनी है
ना ही अपना कोई सपना देखा है,
चल देता है अनजानी राह पर
किसी के भी हांक देने से,
गुम कर दी है सारी ख्वाहिशें
खुद का रास्ता बनाता ही नहीं |


कभी कभी लगता है
इन भेड़ो की तरह चलने वाले इंसानों को,
रोका जाये या नहीं ?
थोड़ा मुश्किल भी लगता है
खुद को इस सब से अलग रखना
लेकिन अलग होना अनिवार्य भी हो गया है |
                          
                              
                                            .....कमलेश.....

बुधवार, 26 अप्रैल 2017

इक किताब है तेरा इश्क



Source-Google

मेरा ठहरा हुआ ख्वाब है शायद
अरसो है मुझमे आदत की तरह
पढ़ने पर जिसको मिल जाते जवाब
वैसी इक किताब है तेरा इश्क ।

जिक्र है जिसके हर पन्ने पर 
तेरी मेरी बेपनाह मोहब्बत का 
लिखावट में जिसके हर अल्फाज की
एहसास है तेरी खूबसूरती का
खुलने पर जिसके मुकम्मल होते ख्वाब 
वैसी इक किताब है तेरा इश्क । 

किस्से कहता रहता है जिसका अंश
तुम्हारी मेरी गहराती चाहत के
सपने दिखाते है जिसके लफ्ज 
अपनी खूबसूरत होती जिंदगी के
समझने पर जिसको महक जाते गुलाब
वैसी इक किताब है तेरा इश्क ।

गहरा है रंग इन अल्फाज़ो का
तेरी काली लहराती जुल्फें जैसे
महकती है जिसकी हर कहानी यूँ
छेड़ती हो मुझे तेरी खुशबू जैसे
घुलने पर जिसमे बहक जाता शबाब
वैसी इक किताब है तेरा इश्क ।                                           
                               .....कमलेश.....

शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

जिंदगी जींए, समझौता ना करें ......

एक घटना मेरे ज़ेहन में ताज़ा हो रही है, बात तब की है जब मेरे परिचित एक परिवार में किसी लड़के ने अपनी मर्ज़ी से 'लव मैरिज' कर ली थी | उस वक़्त जब यह बात घर पर पहुंची तो ऐसा लगा जैसे भूचाल आ गया हो, आनन-फानन में
परिवार वालो ने अपने स्वाभिमान की खातिर बहु और बेटे को समाज से निष्काषित करवा दिया | कुछ समझदार व् पढ़े लिखे लोगों ने उस घटना को सही ठहराया लेकिन उनकी सलाह लड़के वालो के किसी काम न आई | उस लड़के
का किसी गैर ज़ात की लड़की से प्रेम करना, उसके साथ रहने का फैसला करना यहाँ तक मुझे सब कुछ ठीक ठाक लगा लेकिन परिवार और समाज की उस स्वाभिमान की आंधी में वो दोनों बह जायेंगे ये जानकर मेरे ज़मीर को ठेस पहुची।



Source-The Spruce


            गौर करने वाली बात यह है की हमारा समाज प्रेम करने वालों को इतनी हीन भावना से क्यों देखता है ? क्या सिर्फ इसलिए की वे अपने चाहने वाले के साथ अपनी ज़िन्दगी बिताना चाहते है | आज समाज की सोच को बदलने की ज़रुरत है , हमें चाहिए की हम प्रेम करने वालो का सम्मान करें | वैसे भी इंसान इतना गिरा हुआ जीव है जो एक तरफ तो प्रेम के चिन्ह भगवान श्री कृष्ण को पुजता है और दूजी तरफ प्रेम करने वालो से अपने व्यर्थ के स्वाभिमान को बनाये रखने के लिए इतनी नफरत करता है जैसे की उन्होंने इनके किसी रिश्तेदार का क़त्ल कर दिया हो | ये तो बिलकुल अनुचित है कि आप उम्र भर यही चाहें के आपकी संताने हर कदम हर राह पर आपकी बातें मानती रहे | माता-पिता चाहे किसी के
भी हो उनका यह  सोचना गलत है के उनकी औलादें पूरी ज़िन्दगी उनके हुक्म बजाती  रहेगी , ना तो आप लोग उन्हें सपने देखने देते है, और अगर देख लिए तो फिर पुरे नहीं करने देते | कुछ अभागे फिर भी अपनी ख्वाहिशों का क़त्ल करके माँ-बाप के सपनो को पूरा कर भी लेते है तो उनकी एक आस होती है की वो अपने जीवनसाथी को खुद चुने |  
                         
                          मानता हूँ की समाज और परिवार के बड़े
बूढों को ज़िन्दगी का तर्जुबा होता है लेकिन उनको यह हक किसने दे दिया की वे किसी के निजी जीवन में दखलंदाज़ी करने लगे, उनकी ज़िन्दगी तो वो जी लेते है लेकिन बेचारे इन लड़के-लडकियों के रिश्तो को खुद तय करके इनको अपनी
मर्ज़ी की 'लाइफ ' नहीं जीने देते | अरे जब आपने अपनी संतानों की मन की बात कभी जानने की कोशिश की ही नहीं तो आप यह कैसे सोच सकते हैं की आप उनका जीवनसाथी उनसे बेहतर तरीके से चुन सकते है, अगर आपने अपनी
संतानों के सपनो को कभी जाना ही नहीं तो आप को कोई हक नहीं के आप उन्हें किसी के भी साथ हांक देवें |
                      इन बातों से किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मेरा कोई इरादा तो नहीं है लेकिन अगर पहुंचती है तो उसके लिए आप खुद जिम्मेदार है | कोई भी शख्स ऐसे व्यक्ति के साथ सुखद जीवन नहीं बिता सकता जिसे वो
जानता तक न हो, हाँ एक शर्त को छोड़कर के दोनों में से कोई एक राजा बने और कोई एक सेवक | "इस बात की इज़ाजत हर किसी को होनी चाहिए की वो किसी को भी जांच परख कर ही उसे अपना जीवनसाथी चुने |"
                       अब इतनी सी बात पर समाज के कुछ तत्वों को या उनकी व्यर्थ प्रतिष्ठा को इतनी ठेस पहुँचती है की या तो ये उन्हे  ज़लील करते है या फिर उनको जीवन से मुक्त कर देते है यानि की उन्हें मारकर, अगर यह सारे लोग ऐसा ही
सोचते हैं तो इनको वो उम्मीदें तो छोड़ देनी चाहिए जिनमे ये चाहते हैं की इनकी संतानें बुढ़ापे में इन्हें भरपूर सुख प्रदान करेगी |
                      मुश्किल प्रतीत होता है लेकिन इस सत्य को स्वीकारना ही होगा और हर लड़के लडकी को यह हक देना होगा की वो अपनी पसंद से शादी कर सके साथ ही इस शर्त के साथ के इसमें उनके द्वारा उठाये गए क़दमों से कोई
अपमानित महसूस ना करे और ना ही कोई अत्याधिक दुखी हो | अगर झूठी प्रतिष्ठा की इस आग में हम राधा-कृष्ण के उस पावन प्रेम को इसी तरह कलंकित करते रहेंगे तो इस मृत्युलोक में पाप के भागी बनते रहेंगे |
                                                         
                                          .....कमलेश.....


नोट :- यह लेख किसी भी जाति या धर्म की भावनाओं को आहत करने के नजरिये से नहीं लिखा गया है फिर भी अगर आपको ऐसा महसूस होता है तो हम खेद व्यक्त करतें हैं |

बुधवार, 19 अप्रैल 2017

एक सैनिक की जुबानी ...



Source-Oneindia

वो रोज़ हम पर पत्थर फेकते है ,
हम उन पर  गोलियां नहीं दाग़ते 
बल्कि उनको महफूज़ रखने की कोशिश करते है ।
जब कुदरत ने अपना कहर बरपाया 
हमने जान पर खेल कर उनको बचाया ,
उस वक़्त ना मज़हब देखा ना ज़ात 
सोचा तो बस देश और इंसानियत के बारे में ।
जब कभी आतंकीयो ने उनको सताया 
हमारे दोस्तो की कुर्बानीयों ने बचाया ।
हम भी इंसान है इन सब की तरह 
दिल हमारा भी तो धड़कता है वैसे ही ,
हमने पहली बार अपनी इज्ज़त  की खातिर 
इनको सबक क्या सिखा दिया,
हंगामा खड़ा कर दिया नैतिकता के इन् ठेकेदारों ने 
तब क्यों वो पट्टी बांध लेते हैं ?
 जब वो हम पर पत्थर बरसाते है ,
कौन प्यारा है ?हम पूछते है
 ये पत्थरबाज़ या जाँबाज़ सैनिक !

                        
                             .....कमलेश.....

शनिवार, 15 अप्रैल 2017

हक़ है मुझे ।


Source-7wallpapersstyle

तेरे अधरों से मुस्कुराने का
तेरी आँखो में बसने का
तेरी रातों को जागने का,
हक़ है मुझे ।

तेरे कदमों से चलने का
तेरी राहों पर ठहरने का
तेरी मंजिल पर मिलने का,
हक़ है मुझे ।

तेरी आवाज से बोलने का
तेरे हाथों से लिखने का
तेरे दिल में धड़कने का,
हक़ है मुझे ।

तेरे गमों में डूब जाने का
तेरे आँसूओ से रोने का
तेरी तन्हाई में सुलगने का,
हक़ है मुझे ।

तेरी बातों मेें छुपे होने का
तेरी जुल्फों से खेलने का
तेरी साँसो से जीने का,
हक़ है मुझे ।

तेरी यादों में तड़पने का
तुझसे मिलने को तरसने का
तेरे ख्वाबों में सोने का,
हक़ है मुझे ।

                  .....कमलेश.....

सोमवार, 10 अप्रैल 2017

क्या ........ वाकई जायज़ है ?



Source-India Today

आजकल बहुत सी खबरें हम पढ़ते हैं जैसे की एक सरफिरे के द्वारा लड़की की हत्या या फिर उस पर तेज़ाब उड़ेल दिया क्योंकि वो उससे शादी नहीं करना चाहती थी । सवाल यह है कि जब आप किसी से प्रेम करते है  तो उस शक्श पर इस तरह के नृशंस कृत्य करने की वजह क्या होनी चाहिए ? क्या सिर्फ इसलिए कि वो आप ही की तरह आपसे प्यार नही करना चाहता, क्या सिर्फ इतनी सी बात के लिए की वो अपनी दुनिया, अपने सपनो मे जीना चाहता है ।   
                    
           युगों-युगों से चली आ रही इस पवित्र प्रेम भावना को ,इस पवित्र एहसास को आज समाज के संकुचित सोच रखने वालो ने अपने कारनामों से कलंकित कर दिया है ।

                             प्रेम की इस राह मे  वैसे तो किसी भी शर्त का ज़िक्र नहीं है, तो फिर क्यों इन असामाजिक तत्वों को ये लगता है की अगर हम किसी से प्यार करते हैं तो वो भी हमें प्यार करेगा ही, ये बात तो गलत है कि आप प्रेम में रहकर शर्तें लागू करते है । इक खुबसूरत सी लाइन है इंग्लिश मे " देयर  इज नो रूल्स एंड रेगुलेशंस इन लव व्हेरेवेर इट इज, इट मीन्स इट्स अ डील नाॅट लव "। लेकिन ये लोग ना जाने किसी ज़ाहिल की कहावत पर गौर करते हैं जिसने ऐसे ही कह दिया था कि इश्क और जंग में सब कुछ जायज़ है। अरे अगर जायज़ है तो क्या आप लोगो पर तेजाब उड़ेल दोगे उनकी नृशंस तरीके से हत्या कर दोगे । हमारा इतिहास गवाह है जब भी किसी बाहरी शक्श ने इस तरह की हरकत की है हमारे देश के राजा या प्रजा ने किस तरह से उसको मात दी है,इसका  उदहारण है अल्लाउदीन खिलजी जिसने पद्मावती को हथियाने की नाकाम कोशिश की थी ।


Source-ScroopWhoop
         
    एक और दुविधा आजकल की सोच मे  पैदा हो गयी है, ये सोच द्वापरयुग के महान और अमर किरदार श्री कृष्ण के पदचिन्हो पर चलने की कोशिश करते है लेकिन कुछ बाते भुला देते है जैसे कि  उन्होंने कहा था " गुरु करे सो ना कर, गुरू कहे सो कर " ।इन  की बुद्धि गलत तरीके से काम करने लग गयी है, ये एक भ्रांति  लेकर बैठ गए है की कृष्ण गोपियों को छेड़ा करते थे तो हम कुछ ना कुछ तो कर ही सकते है । अरे जब वो ये सब लीलाएं करते थे तब उनकी उम्र बहुत ही छोटी थी ।अपने बचाव मे कुछ असामाजिक तत्त्व एक अजीब बात कहते दिखाई पड़ते हैं की भाई " वो करें तो रासलीला हम करे तो केरैक्टर ढीला" । 
              इतना ही इन्हें यह सब अपने प्रेम मे जायज लगता है तो फिर ये उस वक़्त क्यों हिंसक हो जाते है जब कोई इनके घर की स्त्री के साथ वही सुलूक करता है जो ये दरिंदे दुसरी औरतो पर करना चाहते है । अपने घर की इज़्ज़त इन्हें इज़्ज़त लगती है और गैरों के घर की इज़्ज़त को ये खेल समझते हैं क्या यही एक इनके घर में संस्कार है जो इन्हें दिए जाते है । हर बार दोषी औरत जात को ही ठहराया जाता है कि वह मर्दो को उकसाने के लिए  छोटे कपड़े न पहने अरे स्वर्ग की अप्सराएं भी तो छोटे वस्त्र धारण किया करती है वहाँ उन्हें तो बलात्कार  का शिकार नही होना पड़ता है, मानव जाति तो बिल्कुल गिर चुकी है उस गंदगी के दलदल मे जहाँ से मरणोपरांत ही बाहर आया जा सकता है । 
                
             हर शख्स यह बात याद रखे कि मोहब्बत मे आपके  द्वारा उठाया हुआ कोई भी कदम सिर्फ  तब तक ही ज़ायज़ है जब तक कि वो किसी के भी शरीरिक,आर्थिक या मानसिक नुकसान का कारण ना बनने पाए। 
       
         मुश्किल  प्रतीत होता है लेकिन इस कटु सत्य को मानना ही पड़ेगा तभी इंसान अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा हासिल कर पायेगा नहीं तोह उसे दरिन्दो की श्रेणी में ही गिना जायेगा।

                                             .....कमलेश.....

सोमवार, 3 अप्रैल 2017

तेरा मेरा रिश्ता




Source-Google

जब भी उठती है मेरी कलम
तेरे ही अफ़साने लिखा करती है
राहें ये मेरी अक्सर मुझे
तेरी ही गलियों में लाया करती है
अजीब सा एहसास है क्यूँ
तेरे और मेरे रिश्ते में ।



अक्सर कभी गपशप में अपनी
उठ जाता है ये सवाल भी
के क्या नाम है इस रिश्ते का ?
मुस्काते हुए तब तू कहती है
कुछ ख़ास ना समझो इसे
रास्ता है ये एक दोस्ती का,
सुनकर जवाब को तेरे
सो जाते हैं अरमान मेरे
जो तुझे देख जाग उठे थे ।
अचानक निडर होकर तुम
जब छेड़ देती हो मुझे
घोलकर अपनी साँसों में,
करती हो प्यार फिर मुझे
लगता है इससे हसीन नहीं
ज़िन्दगी का कोई और लम्हा,
मोहब्बत को तेरी पाकर
करता हूँ खुद से सवाल
अजीब सा एहसास है क्यूँ
तेरे और मेरे रिश्ते में ।



तेरी कही हुई वो बाते
आज भी याद है मुझे
के मुझसा नहीं कोई तेरा,
और साथ चलेगी तू मेरे
थामकर मेरे हाथ को
ज़िन्दगी की इस डगर में:
दिए थे जो तोहफे तूने
अज़ीज़ है मेरे आज भी
जैसे हो मेरी जान इनमें।
खिलखिलाकर हंसती जब तू
सारी खलिश मिट जाती है
करी है जब शरारत कोई
मेरे सोये ख़्वाब जगा जाती है
भर कर बाँहों में तुझे जब
दूर हो जाता हूँ जहान् से
कतरा कतरा इस कायनात का
करता है मुझसे ये सवाल
अजीब सा एहसास है क्यूँ
तेरे और मेरे रिश्ते में ।

                           .....कमलेश.....

तुमने ( सियासतदार )

Source - Hindustan Times फिर मुस्कराहट को खामोश कर दिया तुमने, फिर एक दिये की लौ को बुझा दिया तुमने । अभी तो यह जहान् देख भी नही...