शुक्रवार, 26 मई 2017

तुम

Source-Google 

गर्मी के भीषण तूफान् सी निडर,
बनकर के लिपट जाया करो तुम ।

रूख बदलती इन  हवाओं सी, 
फिर से पलटकर आया करो तुम ।

कुछ समझ बादलों से उधार लेकर,
वक्त बेवक़्त मिलने आया करो तुम ।

घनघोर काली घटाएँ बनकर के,
दिल के आँगन पर छाया करो तुम ।

कड़कती चमकती बिजलियों के जैसी,
कभी मुझ पर गिर जाया करो तुम ।

इन बारिशों की बूँदो जैसी निर्लज्ज,
होकर के मुझे छु लिया करो तुम ।

बाढ़ के उस बेकाबू पानी की तरह,
मेरे तन में फैल जाया करो तुम ।

अतिप्रिय-मनभावन सावन के जैसे,
मुझमे समाकर प्रेम किया करो तुम ।
                             
                                                                                 .....कमलेश.....

शुक्रवार, 19 मई 2017

अंधविश्वास


कुछ साल पहले एक फिल्म आई थी PK ,उस पर बहुत बवाल मचाया गया था क्योंकि उसमे दिखाया गया था के लोग किस हद तक अंधविश्वास में डूबे हुए है ।निजी तौर पर, मैंने भी बहुत से कर्मकांड को देखा और सुना है । एक होता है आँख मूंद कर विश्वास करना जो इंसान पर किया जा सकता है लेकिन अंधविश्वास तो बेवजह ही हमारी जिंदगी का हिस्सा बने हुए है ।


                                                                       

Source-Pravakta.com
 बहुत से लोग अंधविश्वासो को भी वर्गीकृत करते है जैसे कि अच्छा और बुरा । धार्मिक दृष्टि से किसी को भी तौलना मेरा स्वभाव तो नही लेकिन यह एक बहुत कड़वा सच है कि हिन्दू धर्म में अनेक अंधविश्वास फलते फूलते है ।
कुछ लोग इन्हे अपनी कमाई का जरिया बनाए हुए है । गौरतलब है कि अन्य धर्म भी अंधविश्वास का शिकार हो गए है, लेकिन अब इसका यह अर्थ तो नही कि हम हमारे जीवन को इनके इशारे पर चलने दे।
   
        अंधविश्वासी लोग अपने आस-पास घटित होती हर चीज को किसी ना किसी तरह बुरे साये या टोटको मे उलझाए हुए रहते है । इनकी एक लंबी चौड़ी सूची बनाई जा सकती है  ( मंगलवार को बाल और नाखून ना काटो,सूर्य अस्त होने के बाद सफाई मत करो, छींक आने पर घर से बाहर ना निकलो, झाड़-फूंक, साधु की ओषधि से गर्भ धारण और लिंग निर्धारण ...)बहुत से ऐसे ही अनोखे नुस्खे है हमारे ईर्द गिर्द । हम लोगो मे से तकरीबन 70 फीसद जनता इन पर विश्वास  (अंधा विश्वास ) करती है । यह सब लोग विज्ञान का इतना घिनौना मजाक उड़ाते है कि वह बर्दाश्त की हदों को भी पार कर जाता है और वे इसका गलत इस्तेमाल भी करते है तब तो कसम से बहुत गुस्सा आ जाता है , लेकिन यहाँ पढ़े लिखे लोग भी अनपढ़ बने हुए रह गए है और अपने द्वारा अर्जित किए हुए ज्ञान को शर्मसार कर रहे है । इन्ही पढ़े लिखे अनपढ़ लोगो ने इनको पनाह दी और पाखंडी लोगो को पनपने का अवसर दिया ।
        
                                                एक वाकये को आप से साझा करते हुए हँसी छुट रही है कि बनारस में घाट पर कुछ साधु, लोगो को बेवकूफ बनाते है  आप यकीन मानिए वे साधु लोगो के स्वर्ग नरक के टिकट बनाते है , वो भी मोटी रकम दक्षिणा मे लेकर और आपके अगले पिछले जन्मो का विवरण करते है । कुछ समय तक विज्ञान ने इनके टोटके के पिछे के रहस्यों को जानने की कोशिश की और खोखली बातों को दुनिया के सामने पेश किया ,लेकिन बदले मे इन पाखंडीयो ने विज्ञान पर सवाल उठाए है ।    विज्ञान अपनी भूमिका अदा करता रहा है और वह आगे भी हमे राह दिखाता रहेगा । ईश्वर का अस्तित्व है या नही इस बात का जवाब कोई भी व्यक्ति नही दे पाएगा लेकिन इन खोखले अंधविश्वासों को कितनी ही बार झुठलाया जा चुका है ।
                      
                        जब तक हम लोग बेवकूफ बनते  रहेगें लोग इन कामों को अंजाम दिया करेंगे, हमारे आस-पास की जिंदगी मे बहुत से होव्वे है इनको मानना आपकी समझदारी है या गलती यह आपकी सोच और जीवनशैली पर निर्भर करता है ।
  
                                           .....कमलेश.....

शनिवार, 13 मई 2017

कुछ वक़्त के बाद




Source-Google


कुछ वक्त के बाद आज फिर ये ख्याल आया है,
पथरीली राहों के इस सफर में क्या मैंने पाया है;
आज ख्वाहिश हो गई एक तस्वीर बनाने की,
चाहत हो गई उसे अपने रंगो में डुबाने की ।

                     
सफर की राहों में जिदंगी को देखा है मैंने,
ठोकर खाकर यहाँ संभलना सीखा है मैंने;
एक अजनबी मुस्कान को अधरों पर रखता हूँ,
क्या रह गया है बाकि यही बात सोचता हूँ;
उन बिखरे ख्वाबों से पुराने मंजर याद आते है,
जाने क्यूँ वो बीते लम्हों को साथ ले आते है;
कुछ वक्त के बाद फिर हौसला आया है,
इस अँधेरी कोठरी में वापस उजाला आया है;
हसरत हो गई नये ख्वाबों को सजाने की,
चाहत हो गई उन्हें अपने रंगो में डुबाने की।
                    
बातों का वो बवंडर डरता रहा मैं जिस से,
उसे आज खुलकर कहने की ख्वाहिश हुई है;
दम घोटती इस छोटी सी दुनिया से,
आज दुर चले जाने की चाहत हुई है;
दामन में खुशियाँ सजाने का हौसला आया है,
बाँहें फैलाकर हँसने का हमें सपना आया है;
कुछ वक्त बाद बेड़ियाँ तोड़ने की हिम्मत आई है,
जैसे इस बेजान जिस्म में जान लौट कर आई है;
ख्वाहिश हो गई नई राहों पर चलने की,
चाहत हो गई उन्हें अपने रंगो में डुबाने की।
                                    
                                          ..... कमलेश .....

सोमवार, 8 मई 2017

देशभक्ति




Source- SulekhaRivr


मैं एक ऐसी भावना हूँ
जो सिजनेबल है ,
वो अवस्था जो कभी कभार
लोगों के दिलों में आती है,
कहने को मेरा कद बहुत ऊँचा है
परन्तु मेरा अस्तित्व
या तो सरहद पर सैनिकों में है
या फिर कुछ भले देशवासियों में |

साल में एक दो बार सारे लोग
मुझे अपने अन्दर बसा लेते हैं,
उसके बाद में खो जाती हूँ
किसी अधूरे सपने की तरह,
किन्तु भला हो उन लोगों का
जो कुछ घटनाओं पर भी
मुझे फिर जीवित कर के
सरकार को परेशान करते हैं |

सारे देश के नेतागण यंहा
मेरी आड़ में वाहवाही लुटते हैं,
जुमलेबाजी और आरोप प्रत्यारोप
हकीक़त के नाम पर जीरो ,
ऐसे ही अगर आप लोग
मुझे भूलते रहेंगे तो याद रखना,
मैं भी एक दिन खो जाउंगी
चुनावी वादों की तरह |


                               - आपकी अपनी
                                                    देशभक्ति

                                              
   .....कमलेश.....

बुधवार, 3 मई 2017

ईश्वर - एक परम सत्य




एक रचना इस सृष्टि के निर्माता को लेकर, जिससे आज की दुनिया मे हर शख्स बहुत दुर जा चुका है ।
इस कविता से आपको हकीकत से अवगत कराने का प्रयास किया गया है ।


तुमने ( सियासतदार )

Source - Hindustan Times फिर मुस्कराहट को खामोश कर दिया तुमने, फिर एक दिये की लौ को बुझा दिया तुमने । अभी तो यह जहान् देख भी नही...