सोमवार, 17 जुलाई 2017

घर लौटकर आना नही चाहता ।

Source - Bindaas Attitude 
सोच रहा हूँ इस दफा
कुछ कपड़े और खरीद लूँ,
गाँव की हर एक गली
घूमकर आँखो में समेट लूँ,
जानने वाले हर शख्स से
एक बार फिर मुलाकात करूँ,
घर की दीवार में लगी
तस्वीर को अपने साथ ले चलूँ,
दिल आज के बाद
घर लौटकर आना नही चाहता ।
कुछ लतीफे जो अधूरे है
बच्चों को सुनाकर पूरे कर दूँ,
कुछ रिश्ते जो रुठे है
मनाकर प्यार से गले लगा लूँ,
रोज़ की राहों को छोड़कर
नयी मंजिलें तलाश करूँ,
ख्वाहिशों को अधूरा रख के
घर लौटकर आना नही चाहता ।
अपने सपनो में प्राण फूंक
नये रास्तों को अपना लूँ,
मेरी तकदीर मेरे साथ रहे
ऐसा कोई अफ़साना बना लूँ,
इस घर, परिवार, और गली से
आज से अजनबी हो जाऊं,
जिंदगी का सूकून गंवाकर
घर लौटकर आना नही चाहता ।
                            .....कमलेश.....

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