गुरुवार, 6 जुलाई 2017

मेरा इश्क




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काली घटाओं सी तेरी जुल्फें

जब हवा के संग लहराती है,

ऐसा लगता है मानो के

कुछ पल में बारिश होने वाली है |

तेरी आँखे लगती है झील सी

जहां आशिक़ी के ख्वाब तेर रहे हैं,

मुस्कान अधरों पर ऐसे छाती है

जैसे सूर्योदय के वक़्त की लालिमा |

झुका लेती हो गर्दन जब शरमा के

प्रेम के दिए जल उठते हैं,

बाहें फैलाकर करती हो आलिंगन जब

मेरा हर अंग तुझमें बिखर जाता है |

सोचता हूँ कर के कैद उस पल को

हासिल कर लूं तेरी बेशुमार मोहब्बत |

तेरे कदम इस तरह चलते हैं

जैसे उर्वर्शी धरा पर आई हो,

पदचिन्ह तुम्हारे जब देखता हूँ

लगता है लक्ष्मी वसुधा पर आई है |

समेट कर के तेरी इस काया को

नाम दे दिया है मोहब्बत मैंने ,

ठहरी है निगाहें और धड़कन

खुद को तेरे नाम कर दिया मैंने |



 
                              .....कमलेश.....
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