शनिवार, 19 अगस्त 2017

तुमने ( सियासतदार )

Source - Hindustan Times

फिर मुस्कराहट को खामोश कर दिया तुमने,
फिर एक दिये की लौ को बुझा दिया तुमने ।

अभी तो यह जहान् देख भी नहीं पाये थे वो,
जिनको इस जहान् से ही मिटा दिया तुमने ।

अपने गुनाहों को छुपाने की कोशिश में फिर,
किसी बेगुनाह की साँसो को काट दिया तुमने ।

शरम अब तो करो ए सियासत के पहरेदारों,
एक माँ की कोख को शमशान कर दिया तुमने ।

माँ है वो बद्दुआ तो कभी दे ही ना सकेगी,
भले ही उसके नाजुक दामन को नोच लिया तुमने ।
                                   .....कमलेश.....
  " श्रद्धांजलि "

सोमवार, 14 अगस्त 2017

सोने की एक चिड़िया रहती थी कहीं खो गई ......



Source - BhaktiGaane.in
सोने की एक चिड़िया रहती थी कहीं खो गई,
औरत एक देवी बनकर रहती थी कहीं खो गई ।

नफरत भर गई है सब की रगों में यहाँ पर,
जुबाँ वो प्रेम को बोलती थी कहीं खो गई ।

कोई किसी का दर्द नहीं पहचानता अब,
जटायु की आत्मा रहती थी कहीं खो गई ।

यमराज से दिखते हैं मुझे देश के नेता अब,
रामराज से दिशाएं गूंजती थी कहीं खो गई ।

अब तो बैर हो गया है गरीबों से अमीरों का,
कृष्ण सुदामा की दोस्ती रहती थी कहीं खो गई ।

मात्र एक छलावा बना दिया है आज प्रेम को,
राधा श्याम की मोहब्बत रहती थी कहीं खो गई ।

काले कारनामों से वतन पर मेरे दाग लगा दिए,
विश्व गुरु जैसी इक छवि होती थी कहीं खो गई ।
                                             
                                             .....कमलेश.....

शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

मुझे पसंद नहीं

मैं तुझे चाँद नही कहना चाहता
ना ही तेरी सूरत को चांदनी
क्यूँ की चाँद को दुनिया देखती है,
लेकिन तुझे मेरी निगाहों के सिवा
कोई और इस तरहा देखे
मुझे पसंद नही ।

Source - ashiotopiko.deviantart

मैं नहीं चाहता की हम दोनों
खुली वादियों की सैर करें,
हवाएं किसी को नही बख्शती
वो किसी को भी कभी भी छू लेती है,
लेकिन तुझे मेरे सिवा कोई छुए
मुझे पसंद नही ।


मैं नहीं चाहता की तू कभी
सोलह श्रंगार करके सामने आये,
क्यूँकी तुझ पर फ़िदा होकर
हर कोई तुझे चाहने लगेगा,
लेकिन मेरे सिवा कोई तुझे चाहे
मुझे पसंद नही ।


मैं नहीं चाहता के हम भीगें
सावन की पहली बारिश में,
भीग जाने से पानी तेरी जुल्फों में
अपना अक्स खोकर उतर जायेगा,
लेकिन मेरे सिवा तुझमें कोई खो जाये
मुझे पसंद नही ।


                          .....कमलेश..... 



रविवार, 6 अगस्त 2017

एक ख्वाहिश



Source - Times Bull
दस साल बीत गए
अपना सूना हाथ देखते हुए,
हर मर्तबा सोचता हूँ
किस गुनाह की सजा है ये ?
इस दफा आस है एक खत की
जो 'प्यारे भाई' से शुरू हो,
अपने नसीब में उस प्रेम को
खुद लिखने की हसरत है मेरी ।
इस बंधन की बंदिशे ही
मेरे हाथो को रास आती है,
ऐसा शख्स जिसके होने भर से
किसी की गलतियां छुपती है,
किसी की अनंत शरारतें
तो कभी मोहब्बत भी ।
बिना डरे जिम्मेदारियों को
अपने कंधे पर लेने वाली,
हर बार मेरी ख्वाहिशों को
माँ की तरहा जान लेने वाली,
इक प्यारी सी बहन की वो
राखी मुझे इस साल चाहिए,
खुशनसीब शक्स को ही हासिल वो
प्रेम मुझे इस साल चाहिए ।
                        .....कमलेश.....
 

गुरुवार, 3 अगस्त 2017

तुझे याद करना भूल गया था ।



Source - Pinterest.co.kr


आज मेरे कमरे ने मुझसे हंसकर बात नही की
आज बिस्तर ने उठकर मुझे गले भी नहीं लगाया
आज कम्बल ने बेशर्मी से मुझको ओढा नही
आज मैं शायद तुझे याद करना भूल गया था |

आज मेरे शीशे ने मेरी सूरत को नही देखा 
आज मेरी कलम ने मुझसे कुछ लिखा नही
आज मेरे लिबास ने मुझको पहना ही नही
आज मैं शायद तुझे याद करना भूल गया था |

आज मेरी ग़ज़ल ने मुझे पढने से इनकार किया
आज मेरे चश्मे ने मेरी आँखों को धुंधला किया
आज मेरे हाथ खुदा की इबादत से मुकर गए
आज मैं शायद तुझे याद करना भूल गया था |

आज मेरी चाय आप ही बेस्वाद हो गयी
आज मेरी खाने से ज़रा अनबन हो गयी
आज घडी ने मेरा वक़्त मुझे नही लौटाया
आज मैं शायद तुझे याद करना भूल गया था |

                                         .....कमलेश..... 

तुमने ( सियासतदार )

Source - Hindustan Times फिर मुस्कराहट को खामोश कर दिया तुमने, फिर एक दिये की लौ को बुझा दिया तुमने । अभी तो यह जहान् देख भी नही...