शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

मुझे पसंद नहीं

मैं तुझे चाँद नही कहना चाहता
ना ही तेरी सूरत को चांदनी
क्यूँ की चाँद को दुनिया देखती है,
लेकिन तुझे मेरी निगाहों के सिवा
कोई और इस तरहा देखे
मुझे पसंद नही ।

Source - ashiotopiko.deviantart

मैं नहीं चाहता की हम दोनों
खुली वादियों की सैर करें,
हवाएं किसी को नही बख्शती
वो किसी को भी कभी भी छू लेती है,
लेकिन तुझे मेरे सिवा कोई छुए
मुझे पसंद नही ।


मैं नहीं चाहता की तू कभी
सोलह श्रंगार करके सामने आये,
क्यूँकी तुझ पर फ़िदा होकर
हर कोई तुझे चाहने लगेगा,
लेकिन मेरे सिवा कोई तुझे चाहे
मुझे पसंद नही ।


मैं नहीं चाहता के हम भीगें
सावन की पहली बारिश में,
भीग जाने से पानी तेरी जुल्फों में
अपना अक्स खोकर उतर जायेगा,
लेकिन मेरे सिवा तुझमें कोई खो जाये
मुझे पसंद नही ।


                          .....कमलेश..... 



एक टिप्पणी भेजें

तुमने ( सियासतदार )

Source - Hindustan Times फिर मुस्कराहट को खामोश कर दिया तुमने, फिर एक दिये की लौ को बुझा दिया तुमने । अभी तो यह जहान् देख भी नही...